बिगिनर्स के लिए प्री और पोस्ट वर्कआउट सप्लीमेंट गाइड

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आपने हाल ही में जिम में पसीना बहाना शुरू किया है और अब आप अपने बॉडीबिल्डिंग के सपने को पूरा करने के लिए अतिशक्तिशाली प्रोटीन पर निर्भर हैं। लेकिन, क्या यही आपकी एकमात्र जरूरत है?

लगभग सभी एथलीट्स, बॉडीबिल्डर्स, और स्पोर्ट एंथुज़ियास्ट अपने वर्कआउट की तीव्रता, स्तिरथा को दूसरे स्तर तक ले जाने और अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए आवश्यक शक्ति को बढ़ाने के लिए सप्लिमेंट पर  बहुत अधिक निर्भर रहते हैं। व्हे प्रोटीन पाउडर का सेवन तो ज़रूर करना चाहिए पर साथ ही अपनी डाइट में प्री और पोस्ट वर्कआउट सप्लिमेंट्स को भी 

सम्मिलित करना चाहिए।  

आपके प्री-वर्कआउट सप्लिमेंट्स, आदर्शरूप से कार्बोहाईड्रेट्स और कैफीन का मिश्रण होते है जो थकावट को दूर करते है और आपको वर्कआउट के आखिरी सेट तक ऊर्जावान बनाए रखते है। पोस्ट वर्कआउट रिकवरी ब्लेंड आपके मसल्स रिकवरी प्रोसेस को बढ़ाता है। ब्रांच्ड एमीनो  एसिड सबसे ज्यादा सलाह दिया जाने वाला पोस्ट वर्कआउट इंग्रीडिएंट है जो आपको दर्द 

से निपटने में मदद करता है और मसल्स व् टिशूज़ रिपेयर करता है। 
 
आगे पढ़िए 5 मूलभूत इंग्रीडिएंट्स के बारे में जिन्हें आपके प्री और पोस्ट वर्कआउट ब्लेंड का हिस्सा बनना चाहिए-  


1. कार्बोहाइड्रेट्स

प्री और पोस्ट : दोनो

कार्बोहाइड्रेट्स उनके लिए अहम भूमिका निभाते हैं जो एक बार में एक घंटे से ज्यादा वर्कआउट करते हैं, जैसे एथलीट्स। कार्ब्स आपके मसल्स में ग्लाइकोजन के रूप में शरीर में जमा होकर दुबारा ऊर्जा भरते हैं। ग्लाइकोजन का शरीर में निम्न स्तर आपको थका देता है, इस प्रकार जब आप जिम में अत्यधिक वर्कआउट कर रहे होते हैं तब यह ग्लाइकोजन जो 

कि कार्ब्स से आता है, आपके मसल्स में रिफ्यूलिंग करता है ताकि आप अभ्यास के अंतिम समय तक व्यायाम कर सके। अगर आप वर्कआउट के पहले पर्याप्त मात्रा में कार्ब्स नहीं लेते हैं तो ग्लाइकोजन का स्तर बहुत नीचे आ जाता है और ऊर्जा की पूर्ति के लिए कोई बैकअप नहीं रहता। इससे वर्कआउट के दौरान चोटिल होने का खतरा बढ़ जाता है।

यहां, जब हम कार्ब्स पर ज़ोर दे रहें हैं इसका मतलब कदापि यह नहीं है कि आप पूरी प्लेट पास्ता खा लें। इसकी जगह पर आप वर्कआउट फ्यूल के रूप में कार्ब्स सप्लिमेंट्स और स्पोर्ट्स ड्रिंक लें जिससे की आप आश्वस्त हो सके की आपके शरीर का ऊर्जा टैंक भर गया है।

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2. कैफीन

प्री या पोस्ट : प्री-वर्कआउट

अगर आप अपनी ट्रेनिंग को और सरल बनाना चाहते हैं तो आप अपने पसंदीदा प्री-वर्कआउट सप्लिमेंट के रूप में कैफीन लेना शूरू कर दें। बहुत सारे अध्ययनो ने साबित किया है कि जिन एथलीट्स और खिलाड़ियों ने कैफीन को प्री-वर्कआउट सप्लिमेंट के रूप में लिया, उनका ट्रेनिंग के दौरान एंड्यूरेंस ज्यादा रहा। फिर भी, आ,पको अपने सप्लिमेंट के डोसेज पर 

सचेत रहने की जरूरत है क्योंकि कैफीन की ज्यादा मात्रा आपको चिड़चिड़ा, वमनजनक और बेचैन कर सकती है। इसके अलावा अगर आप कैफीन से संवेदनशील हैं तो आप इसका त्याग करें क्योंकि इससे आपको नुकसान हो सकता है।

3. विटामिन सी

प्री या पोस्ट : दोनो

विटामिन सी एक सामान्य सप्लिमेंट है जिसका सेवन प्राय: लोग तब करते हैं जब वे ठंड से ग्रसित होते हैं। लेकिन जो बात लोगों को विटामिन सी के बारे में पता नहीं है वह यह है कि यह तनावमुक्त होने के लिए भी बहुत कारगर है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की तनाव की वजह बहुत कठिन व्यायाम है या मौसम का बदलना। विटामिन सी एक 

एंटीऑक्सिडेंट है जो मेटाबॉलिक तनाव से लड़ता है। इसलिए जब कभी भी आपका शरीर तनाव से ग्रसित होता है तब आप विटामिन सी की प्रचुर मात्रा वर्कआउट के दौरान जरूर लें ताकि आप अपने शरीर के सिस्टम को मजबूत कर सकें। इसके अलावा, विटामिन सी ए.सी. वाले जिम में पसीने आने के बाद होने वाली सामान्य खांसी और ठंड की संभावना को 

कम कर देता है।

4. विटामिन बी6 और बी12

प्री या पोस्ट: दोनो

यह असामान्य नहीं है कि लोगों में विटामिन बी कांप्लेक्स की कमी होती है, विशेषकर बी6 की, लेकिन क्लिनिकली विटामिन बी12 की कमी बहुत ही दुर्लभ है। तनाव की स्थिति में विटामिन की कमी को जानने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं है लेकिन इसकी संभावना को भी पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता है।

दूनिया भर में कई स्वास्थय संस्थाओं द्वारा ज़ारी की गई रिपोर्ट्स के अनुसार, विटामिन बी शरीर में लाल रक्त कोशिका के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है और शरीर द्वारा सेवन किए गए भोजन से ऊर्जा उपलब्ध करवाता है। यहीं नहीं, ये सूजन को कम करने में मदद करता है और नींद के तरीके को विनियमित करता है। साधारण शब्दों में, विटामिन 

शरीर की प्रक्रियाओं को सही करता है जोकि हमें वर्कआउट के दौरान और दूसरे समय में शक्तिशाली रखता है।

6. बीसीएए ब्लेंड

प्री या पोस्ट: दोनो

ब्रांच्ड एमीनो एसिड्स सामान्यतौर पर तीन महत्वपूर्ण एमीनो एसिड्स- ल्युसाइन, आइसोल्युसाइन, और वैलाइन के बीसीएए के ब्लेंड के रूप में जाना जाता है। हमारा शरीर इन एमीनो एसिड्स का प्रयोग पाचन, शरीर के टिशूज़ रिपेयरिंग और शरीर के विकास को बढ़ावा देने में काम आता है। बीसीएए प्रोटीन के प्राकृतिक स्तोत्र जैसे-अंडे और मांस में भी पाया जाता 

है। जो लोग मसल्स विकसित करना चाहते हैं, उनके लिए तीनों एमीनो एसिड्स से बना बीसीएए ब्लेंड बहुत जरूरी है। इसके अलावा, बीसीएए एक प्री और पोस्ट वर्कआउट सप्लिमेंट के रूप में इंटेस वर्कआउट के बाद होने वाले टिशूज़ डैमेज को भी रिपेयर करता है।

अंतिम निष्कर्ष

वर्कआउट सप्लिमेंट के उपयोग में रेगूलेशन की कमी शुरूआत में मुश्किल पैदा कर सकती है। यह जानने के लिए कि कौन सा ब्लेंड असली और कौन सा नकली है यह सलाह दी जाती है कि आप हमेशा सर्टीफाइड और प्रमाणित ब्रांड से ही प्रोडक्ट खरीदें। व्यायाम शुरूआत करने वाले के लिए  इन सप्लीमेंट्स की जानकारी आपको सीमित होगी, इसलिए बेहतर 

होगा आप अपने ट्रेनर या न्युट्रिशनिस्ट की सलाह लें। वें ना केवल आपको सही ब्रांड चुनने में मदद करेंगे बल्कि वे आपको सही प्रकार के ब्लेंड्स की भी सलाह देंगे ताकि आपको वर्कआउट रूटीन, लक्ष्य और शारीरिक विकारों  में मदद मिले।  

अंत में, बिना इसमें पड़े कि आप कौन सा प्री और पोस्ट वर्कआउट सप्लिमेंट ब्लेंड चुनते हैं,  यह निश्चित जाने की वे तब तक आपकी मदद नहीं करेंगे जबतक की आप व्यायाम और संतुलित डाइट से मजबूत नींव नहीं डालते हैं। 

 

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