फैट बर्नर सप्लिमेंट्स समझने के लिए गाइड

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क्या आप उन लाखों लोगो में से हैं जो निरंतर अवांछित मोटापे को तुरंत कम करने और शरीर को सही आकार में लाकर जल्द आकर्षित बनाने के लिए एक क्विक सोल्यूशन ढूंढ रहे हैं?

जहां मोटापे को तुरंत कम करने के  लिए दवा सही विकल्प नहीं हैं वहीं शरीर से अवांछित फैट को हटाने के लिए कुछ सप्लिमेंट्स हैं जिसके सहारे आप वजन कम करने के अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं अगर आप इनका सेवन, संयम, निरंतर व्यायाम और हेल्दी डाइट के साथ करें तो।     

जहां बेहतरीन पौष्टिक पदार्थ और सघन ट्रेनिंग वजन कम करने का सबसे प्रभावशाली हथियार है वहीं आप कुछ फॉर्मूलेटेड फैट बर्निंग सप्लिमेंट्स ले सकते हैं ताकि वजन कम करने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। फैट बर्निंग सप्लिमेंट्स में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो फैट बर्न करने की प्रक्रिया को अतिरिक्त गति देते हैं। फिर भी वजन कम करने में ये सप्लिमेंट्स बहुत अधिक योगदान नहीं करते। आप इनका इस्तेमाल अपने डाइट प्लान और व्यायाम की जगह नहीं कर सकते हैं।

फैट बर्नर के प्रकार

आजकल बाज़ार में अलग-अलग तरह के फैट बर्निंग सप्लिमेंट्स की भरमार हो गइ हैं जिसकी वजह से यह निर्णय लेना कठिन हो गया है कि कौन सा फैट बर्नर सप्लिमेंट आपके वजन कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा। फिर भी आप जेनेरीक फैट बर्नर बायर्स गाइड की सहायता से आसनी से अपने पसंद के सप्लिमेंट ले सकते है।

वृहत रूप से सबसे प्रभावशाली फैट बर्नर्स दो वर्ग में आते हैं ये क्रमश: स्टिमुलैंट बेस्ड और स्टिमुलैंट फ्री के नाम से जाने जाते है। चलिए संक्षेप में जानते हैं कि कैसे ये दोनो एक दूसरे से अलग है:

फैट बर्नर के प्रकार

स्टिमुलैंट फ्री फैट बर्नर्स:  कुछ लोग फैट बर्नर में मौजूद तत्वों जैसे कैफीन, साईनेफ्रिन, टाईरामाईन और योहिम्बाईन ( या योहिम्ब) से सेंसिटिव होते हैं, उनके लिए स्टिमुलैंट फ्री फैट बर्निंग उपयुक्त हैं। फैट बर्निंग के लिए मुख्य रूप प्राथमिक तत्व का उपयोग उनके फार्मूलेशन के लिए होता है, जिनमें ग्रीन टी एक्ट्रैक्ट और एसटाइल-एल-कार्निटाईन आते हैं, भूख बढ़ाने के लिए कैराल्युमा फिमब्रिएटा एक्ट्रैक्ट और दूसरे नेचुरल एक्ट्रैक्टस जैसे फैज़िओलस वलगैरीज़ (व्हाईट किडनी बीन) और साईनैरा स्कोलाइमस (अर्टिचोक) आदि यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रभावीरूप से वजन कम हो।

स्टिमुलैंट बेस्ड फैट बर्नर्स: इस तरह के फैट बर्नर्स ज्यादातर अग्रलिखित तत्वों के मिश्रण होते हैं: कैफीन साईनेफ्रिराईऩ, टाईरामाईन और योहिम्ब। ये सभी तत्व भूख बढ़ाने, ऊर्जा को बढ़ाने, बर्निंग फैट सेल्स को बढ़ाने में सहायक होते हैं ताकि फैट शरीर से ऊर्जा के रूप में बाहर आ जाए। कुछ स्टिमुलैंट बेस्ड फैट बर्निंग सप्लिमेंट में ऐसे तत्वो को भी शामिल किया जाता है जो स्टिमुलैंट फ्री फैट बर्नर्स में पाये जाते है ताकि प्रभावी फॉर्मुलेशन हो सके।

फैट बर्नर से अधिकतम लाभ लेने के लिए इन बातो को ध्यान में रखना आवश्यक है-

सप्लिमेंट्स की तरह फैट बर्नर्स के भी कुछ साइड ईफेक्टस हैं जिन्हें वेट लूज़ प्लान में शामिल करते वक्त कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रख कर बचा जा सकता है। याद रखें कि यह एक ‘सप्लिमेंट’ है इसका मतलब यह है कि आप इस वेट लूज़ प्लान में इसे शामिल कर रहे हैं ताकि आप वजन कम करने की प्रक्रिया को तीव्र कर सके। फैट बर्निंग सप्लिमेंट का सेवन करने का मतलब कदापि यह नहीं है कि आप इसे अपनी डाइट या व्यायाम से बदल दें, ऐसा करना आपके लिए घातक हो सकता है और कई तरह के साईड इफेक्ट हो सकते हैं  जिसकी वजह से आपकी सेहत पर अच्छे प्रभाव की जगह बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं।

इसलिए निम्नलिखित बातों का हमेशा ध्यान रखें ताकि फैट बर्नर्स के घातक साइड इफेक्ट आपसे दूर रहे।

सप्लिमेंट्स

1. डाइट आपके वजन कम करने की लड़ाई का सबसे प्रमुख हथियार है

बहुत बार लोगो को लगता है कि केवल फैट बर्निंग सप्लिमेंट्स ही उनके इच्छा अनुसार वजह कम करने के परिणाम को हासिल करने के लिए काफी  है। हालंकि यह सच नहीं है, एक फैट बर्नर सप्लिमेंट कोई जादुई हल नहीं है। इसे एक अच्छे डाइट और व्यायाम प्लान की जरूरत होती है ताकि फैट बर्न हो सके और मनवांछित परिणाम हासिल हो। कैलोरी पर लगाम और अनुशासित व्यायाम आपके 80% वजन कम करने की लड़ाई को जिता देता है, शेष 20% की भरपायी फैट बर्नर्स कर देता है। लेकिन यह केवल उपयुक्त डाइट के साथ मिलकर कार्य करता है।

एक फैट बर्नर आपके शरीर पर विविध तरीके से काम करता है जैसे- यह ऊर्जा को बढ़ाता है, भूख पर नियंत्रण करता है, फैट का इस्तमाल ऊर्जा के रूप में करता है, आपके मेटाबॉलिज्म और शरीर के तापमान को बढ़ाता है ताकि पूरे दिन में आप ज्यादा से ज्यादा कैलोरी को नष्ट कर सकें।

आप अपने कैलोरी की चतुराई से गणना करें ताकि आप फैट बर्नर सप्लिमेंट्स के अधिकतम लाभ ऊठा सके।

2. फैट बर्नर का अत्यधिक इस्तेमाल ना करें

अति किसी भी चीज में गलत है और यह सिद्धांत फैट बर्नर सप्लमेंट्स के साथ भी लागू होता है। कुछ लोग पूछते हैं कि ‘फैट बर्निंग क्या सुरक्षित है?’, हाँ, ये सुरक्षित हैं लेकिन जब तक आप इसका संयम के साथ उपयोग करते हैं। नो मैटर आपके फैट बर्निंग सप्लिमेंट में कितने भी पॉवरफुल तत्व क्यों ना हो, जितनी सलाह दी गई है उस से अधिक सेवन ना करें। इसलिए आप या तो पैकेज को चेक करें या फिर अपने ट्रेनर से राय लें कि आपके शरीर को प्रभावीरूप से वजन कम करने के लिए कितने बर्निंग सप्लिमेंट की ज़रूरत है।    

3. वास्तविक अपेक्षा रखें

जो लोग इस बात से वाकिफ नहीं है कि फैट बर्नर सप्लिमेंट का इस्तेमाल कैस करें वे अवास्तविक अपेक्षा रख लेते है और अंत में जब उन्हें मनवांछित परिणाम हासिल नहीं होता तब वे निराश हो जाते हैं। अब फिर बता दें कि एक फैट बर्नर कोई जादुई ड्रिंक नहीं है जो कुछ ही सप्ताह में कई पाऊंड फैट को कम कर दे। निश्चित रूप से यह आपके वजन कम करने की दर को बढ़ाता है पर इतना भी नहीं की एक सप्ताह में 10 पाऊंड कम हो जाए।

एक हेल्दी वेट लूज़ होने से अभिप्राय यह है कि हर सप्ताह 2 से 4 पाऊंड वजन कम हो लेकिन यह भी हमेशा ससटेनएबल नहीं होता है। आपके शरीर का वजन धीरे धीरे कम होगा जैसे- जैसे आपका शरीर एक स्थिरांक पर पहुंचेगा।

आप एक तालिका बना सकते हैं ताकि आप हर सप्ताह या हर महीने देख सकें कि आपने कितना वजन कम किया है साथ ही यह आपका उत्साह भी बढ़ाएगा। इसके अलावा आप चेक कर सकते हैं कि आपका वेट लूज़ डाइट, व्यायाम और फैट बर्नर्स कैसे काम कर रहें हैं। 

फैट बर्नर

4. कैफीन के अत्यधिक इस्तेमाल नुकसान कर सकता है

दिन की शुरूआत बिना रेगुलर हॉट कप्पा के बहुत लोगो के लिए कठिन होता है और वे दिन में 2 से 3 कम जरूर पीते हैं। अगर आप भी उन लोगो में से हैं जो प्रतिदिन कैफीन की अधिक डोज़ लेते है तो आप फैट बर्निंग सप्लिमेंट चुनते वक्त सतर्क हो जाएं। ज्यदातर फैट बर्नर्स में पहले से ही कैफीन मौजूद होती हैं जो कि फैट बर्नर का एक प्रमुख स्टिमुलैंट है। इसलिए अगर आप वजन कम करने की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए फैट बर्नर लेना चाहते हैं तो आपके लिए बेहतर होगा लेकिन आप कैफीन की मात्रा निरंतर चेक करते रहें।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कैफीन के बेनिफिट से कितनी ऊर्जा मिलती है, इसकी अत्यधिक मात्रा आपके शरीर को पूरी तरह नुकसान करेगी। आपके फैट बर्नर और आपके पसंदीदा पेय पदार्थ दोनो से मिलने वाली कैफीन आपके शरीर का फैट तो कम करेंगे लेकिन इसकी वजह से आप कमजोरी और थकावट महसूस करेंगे जिसे आपको इंटेंसिव वर्कआउट करने में कठिनाई होगी। फैट बर्नर्स और कैफीन का यह एक संभावित नुकसान है क्योंकि दोनो एक साथ आपके वजन कम करने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं। 

फैट बर्नर का प्रभावी रूप से कैसे इस्तेमाल करें

फैट बर्नर सप्लिमेंट का कैलोरी नियत्रंण और व्यायाम के साथ सर्वाधिक लाभ ऊठाने के लिए यह सलाह दी जाती है कि इसका सेवन रोज नाश्ते या दोपहर के खाने के 30 मिनट पहले करें। फिर भी अगर आप शाम को व्यायाम नहीं करते और आपका रूझान स्टिमुलैंट फ्री फैट बर्नर के तरफ है तब आप रात्रि भोजन के 30 मिनट पहले इसका सेवन करें।

हर भोजन के पहले बताए गए फैट बर्नर सप्लिमेंट का डोज लें, इससे आप पेट भरा महसूस करेंगे और यह आपके शरीर में मेटाबॉलिज्म को बढ़ायेगा। 

क्योंकि आपके फैट बर्निंग सप्लिमेंट स्टिमुलैंट्स- जैसे कैफीन, के डाईयुरेटिक प्रभाव की वजह से आपके शरीर से पसीना बहुत अधिक निकालता है और इस प्रकार आपके शरीर में हाइड्रेशन अति आवश्यक हो जाता है। बहुत अधिक मात्रा में पानी पीयें ताकि शरीर हाईड्रेटेड होता रहे और शरीर से टॉक्सिंस बाहर जात रहें जो कि एक अच्छी जीवनशैली है। अगर आप फैट बर्नर्स ले रहे हैं तो यह सुनिश्चित कर लें कि आप हर रोज कम से कम 2 से 4 लीटर पानी पीये। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप हर फैट बर्नर की डोज लेते वक्त 1 कप पानी अवश्य पीये ताकि शरीर में पानी की मात्रा बनी रहे। 

इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपका फैट बर्नर कितना प्रभावी है, यह आपकी डाइट और व्यायम की जगह नहीं ले सकता है, जबतक कि आप फैट बर्नर सप्लिमेंट के साईड इफेक्ट को खुद झेलने के लिए तैयार ना हो जाएं। अगर आप इसे सही तरीके से लें और सही मात्रा में ले तो फैट बर्नर सप्लिमेंट्स निश्चित रूप से आपके वजन कम करने के लक्षय को प्राप्त करने में मददगार साबित होगें।

आप यह सुनिश्चित कर ले कि आप फैट बर्नर के रिव्यू अवश्य पढ़े और प्रोडक्ट के लेबल से आपको यह समझने में आसानी होगी कि इसमें कौन-कौन से तत्व हैं और इसके क्या प्रभाव है।

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