Women's Wellness 1 MIN READ 2189 VIEWS December 20, 2022 Read in English

महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य: सामान्य समस्याएं

Written By HealthKart
Medically Reviewed By Dr. Aarti Nehra

महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य इस कारण से प्रमुख चिंता का विषय है कि अधिकांश महिलाएं अपने जीवन में बड़े परिवर्तन से गुजरती हैं। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कई प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं हैं जो पूरी दुनिया की महिलाओं को प्रभावित करती हैं। जहाँ कुछ महिलाएं केवल एक प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य समस्या के साथ संघर्ष करती हैं, वहीअन्य महिलाएं कई मानसिक समस्याओं का एक साथ सामना करती हैं। किसी व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य उसके दैनिक जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित कर सकता है – और इस तरफ किसी का ध्यान भी नहीं जाता है। इस लेख में, हम महिलाओं में होने वाली विभिन्न प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और उनसे निपटने के तरीके के बारे में गहराई से जानेंगे।

महिलाओं की सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं

महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की सूची निम्नलिखित है:

1. अवसाद

कई अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में, अवसाद महिलाओं में सबसे अधिक आम समस्या में से एक है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं अवसाद से ज्यादा ग्रस्त रहती हैं।

महिलाओं में आमतौर पर पाए जाने वाले अवसाद के विभिन्न लक्षण हैं बार-बार रोना, अकेलापन महसूस करना, वजन कम होना और आसानी से चिढ़ना/गुस्सा होना। उनके पास फिर कुछ भी करने या किसी गतिविधि का आनंद लेने के लिए किसी प्रकार की ऊर्जा शेष नहीं रह पाती है। कुछ लोगों को तो उदास होने पर खुद को चोट पहुँचाने की भी इच्छा होती है। अध्ययनों के अनुसार, वृद्ध लोगों में और जो लोग कठिन सामाजिक जीवन से गुजरते हैं उनमें अवसाद का खतरा अधिक होता है । महिलाओं में अवसाद का होना उन्हें अक्सर कर्कश और चिड़चिड़ा बना देता है और वह भी बिना किसी उचित कारण के।

2. चिंता

बहुत सी महिलाएं अपने जीवन में चिंता का अनुभव अलग तरह से करती हैं। चिंता का कारण आमतौर पर तनाव होता है। लेकिन जब यह आपके नियमित जीवन और काम को प्रभावित करने लगे तो यह एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। चिंता विकार एक सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जो महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।

मासिक धर्म के समय हार्मोनल परिवर्तन, और यौन हमले और दुर्व्यवहार जैसी दर्दनाक घटनाएं महिलाओं में चिंता विकार का कारण बन सकती हैं। कभी-कभी, इसकी वजह आनुवंशिकी भी होती है; चिंता जीन के माध्यम से स्थानांतरित भी हो सकती है।

महिलाओं में चिंता के कुछ अलग-अलग रूप देखे जाते हैं जैसे कि सामान्यीकृत चिंता विकार, जो तब होता है जब कोई व्यक्ति परिवार, स्वास्थ्य या काम जैसी दैनिक जीवन की समस्याओं के बारे में जोर देना शुरू कर देता है। एक और है पैनिक डिसऑर्डर, जो तब होता है जब महिलाओं को लगता है कि वे घबरा रही हैं या किसी चीज पर नियंत्रण खो रही हैं।

चिंता से पीड़ित महिलाओं में पाए जाने वाली सबसे आम परेशानियां पेट दर्द, मतली, हृदय गति बढ़ना, बार-बार कमज़ोरी  महसूस करना, एकाग्रता में कमी, घबराहट / तनाव महसूस करना, नींद की समस्या आदि हैं।

3. प्रसवकालीन अवसाद

प्रसवकालीन अवसाद गर्भावस्था के बाद या उसके दौरान महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह महिलाओं में देखे जाने वाली एक बहुत ही सामान्य प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य समस्या है। आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारक , प्रसवकालीन अवसाद के महत्वपूर्ण जनक  हैं। गर्भावस्था में एक ही समय में बहुत सारे शारीरिक और जीवनशैली से सम्बंधित बदलाव शामिल होते हैं, जो किसी भी महिला के लिए असहज हो सकता है और प्रसवकालीन अवसाद का कारण बन सकता है।

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के मूड में काफी उतार-चढ़ाव होते हैं। प्रसवकालीन अवसाद से पीड़ित होने के बाद महिलाओं में दिखाई देने वाले विभिन्न लक्षण ध्यान की कमी, मतली, हर समय थकान महसूस करना आदि हैं।on.

4. खाने के विकार

महिलाओं में, खाने के विकार होना बहुत अधिक प्रचलित हैं। यह विभिन्न प्रकार का हो सकता है और इसका आसानी से इलाज नहीं किया जा सकता है। खाने के विकारों के विभिन्न रूप जो महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, वे हैं एनोरेक्सिया नर्वोसा, ठूस ठूस कर खाना और बुलिमिया नर्वोसा। महिलाओं में खाने के विकार पैदा करने वाले विभिन्न कारण तनाव, बचपन का मोटापा और हार्मोनल परिवर्तन हैं। चिंता और अवसाद से ग्रस्त महिलाओं को अक्सर खाने के विकारों का सामना करना पड़ता है।

खाने के विकार वाली महिलाएं मुख्य रूप से भोजन से परहेज करना, वजन कम करना शुरू कर देती है, जिसके लिए वह बहुत अधिक व्यायाम और डाइटिंग करना शुरू कर देती है, और उसकी वजह से मधुमेह से पीड़ित भी हो जाती हैं।

5. पोस्ट ट्रॉमेटिक तनाव विकार

जिन महिलाओं ने अपने जीवन में किसी भी प्रकार की दर्दनाक, डरावनी या चौंकाने वाली घटनाओं का अनुभव किया है, वे पोस्ट ट्रॉमेटिक तनाव से ग्रस्त होती है। महिलाओं के भीतर पोस्ट ट्रॉमेटिक तनाव सिंड्रोम का कारण यौन उत्पीड़न, किसी करीबी व्यक्ति की अचानक मृत्यु, या कोई दुर्घटना हो सकती हैं।

पीटीएसडी से पीड़ित महिलाओं में अक्सर देखे जाने वाले लक्षण अवांछित अतीत की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति, उन यादों के फ्लैशबैक, बुरे सपने, मतिभ्रम आदि हैं। इस विकार की तीव्रता घटनाओं के प्रकार के अनुसार बदलती रहती है।

6. प्रसवोत्तर अवसाद

जन्म देने के बाद महिलाएं प्रसवोत्तर अवसाद से पीड़ित हो जाती हैं। यह एक प्रकार का मानसिक विकार है जिसमें शारीरिक, व्यवहारिक और भावनात्मक परिवर्तन शामिल होते हैं। महिलाओं में प्रजनन हार्मोन जो कि प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन होते हैं वें गर्भावस्था के दौरान और बच्चे को जन्म देने के बाद, कम हो जाते हैं, जो महिलाओं में इस प्रकार की मानसिक बीमारी का कारण बनते हैं।

महिलाओं में देखे जाने वाले प्रसवोत्तर अवसाद के विभिन्न लक्षण हैं बार-बार मिजाज बदलना, अनिद्रा, भूख न लगना और थकान।

7. बाइपोलर डिसऑर्डर

बाइपोलर डिसऑर्डर एक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जिसका सामना महिलाओं को करना पड़ता है। हार्मोनल असंतुलन, भावनात्मक शोषण, और कई अन्य चीजें हैं जिसके कारण महिलाओं में बाइपोलर डिसऑर्डर होता हैं। महिलाओं में बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षणों और संकेतों में उन्माद का महसूस होना शामिल हैं जैसे हाई महसूस करना, उच्च ऊर्जा स्तर, सोने में असमर्थता, आसानी से विचलित होना, कुछ महिलाओं को लो या उदास महसूस होना, वजन बढ़ना, हर चीज में रुचि खोना, एकाग्रता की कमी, और बहुत कुछ जैसे लक्षणों के साथ अवसादग्रस्तता का भी अनुभव हो सकता है।

कन्क्लूज़न

मानसिक स्वास्थ्य विकार जैविक के साथ-साथ सामाजिक कारकों का परिणाम हैं। हर महिला को अपने जीवन में कम से कम एक प्रकार की मानसिक बीमारी का सामना तो करना पड़ता ही है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आपके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। यह इसको भी प्रभावित करता है कि आप कार्य को कैसे करते हैं, सोचते हैं या महसूस करते हैं।महिलाओं की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को यही नहीं लेना चाहिए या अनुपचारित नहीं रखना चाहिए। अगर कोई मानसिक रूप से अच्छा महसूस नहीं कर रहा है, तो उसे निश्चित रूप से एक चिकित्सकीय पेशेवर से परामर्श लेना चाहिए और पेशेवर की मदद लेनी चाहिए

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